
एडीएम पंकज उपाध्याय और एसडीएम ऋचा सिंह की बड़ी कार्रवाई: बाजपुर में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़, प्रशासनिक अमले में हड़कंप
पीलीभीत के भाजपा नेता व चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल समेत चार लोग हिरासत में, पुलिस के किया हवाले
देहरादून/बाजपुर। बाजपुर में उत्तर प्रदेश के एक हाईटेक गैंग द्वारा फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए जाने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। मौके पर एडीएम पंकज उपाध्याय, एसडीएम ऋचा सिंह, तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान सहित राजस्व टीम मौजूद रही और पूरे मामले की गहनता से जांच-पड़ताल की जा रही है।
प्रारंभिक कार्रवाई के तहत पुलिस व राजस्व टीम ने यूपी के जिला पीलीभीत के भाजपा नेता एवं नगर पंचायत बरखेड़ा के अध्यक्ष (चेयरमैन) श्याम बिहारी भोजवाल, एक महिला तथा दो अन्य लोगों को हिरासत में लिया है। प्रशासन ने आरोपियों को सीओ अखिलेश कुमार, कोतवाल नरेश चौहान, एसएसआई जसविंदर सिंह और एसआई कैलाश चंद्र की सुपुर्दगी में सौंपा है। नामजद आरोपियों के खिलाफ देर रात्रि तहरीर सौंपकर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि इस गैंग में बाजपुर का एक अधिवक्ता भी शामिल है, जिसकी मुख्य भूमिका सामने आ रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसका भी पर्दाफाश किया जाएगा।
‘क्राइम पुलिस’ की तर्ज पर एसडीएम ऋचा सिंह ने की जांच
एसडीएम ऋचा सिंह ने फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले इस गिरोह का भंडाफोड़ करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने क्राइम पुलिस की तर्ज पर पूरी टीम के साथ दिनभर जांच-पड़ताल कर इस फर्जीवाड़े को उजागर किया।
एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि अभी 19 अन्य प्रमाण पत्रों की जांच-पड़ताल की जानी बाकी है। उन्होंने खुलासा किया कि यह गैंग उन लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था, जिनके नाम संदिग्धों से मेल खाते थे। कागजात देखने में पूरी तरह सही लगते थे, लेकिन जब संबंधित स्थानों पर जाकर जांच की गई, तो उत्तर प्रदेश के इन निवासियों के वहां कोई वास्तविक साक्ष्य नहीं मिले। यह गिरोह फर्जी दस्तावेज लगाकर फर्जी स्थायी निवास/जाति प्रमाण पत्र बनवाता था, जिनका उपयोग नीट (NEET) जैसे एग्जाम में एडमिशन के लिए किया जाता था।
जांच टीम को गुमराह करने का अनूठा तरीका
एडीएम ने गिरोह की कार्यशैली का खुलासा करते हुए बताया कि जब लेखपाल या प्रशासनिक अधिकारी जांच के लिए मौके पर पहुंचते थे, तो यह गैंग पहले से ही अपने फर्जी लोगों को वहां तैयार रखता था। पूछताछ के दौरान वे फर्जी गवाह अधिकारियों से कहते थे कि ‘ये लोग यहीं रहते हैं’, और इस तरह टीम को उलझाने व गुमराह करने का प्रयास करते थे।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जा रही है। अधिकारियों की पूछताछ और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद पूरे प्रकरण का औपचारिक खुलासा किया जाएगा। शासन-प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई से फर्जीवाड़े से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।



