अलविदा गोल्डन ब्वॉय

— भारतीय निशानेबाजी का स्वर्णिम सितारा: जसपाल राणा (1976–2026)
देहरादून– भारतीय निशानेबाजी जगत को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब देश के महानतम पिस्टल निशानेबाजों और कोचों में शुमार जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था जहां उन्होंने शुक्रवार सुबह अंतिम सांस ली। उनके शरीर को देहरादून स्थित जसपाल राणा शूटिंग रेंज लाया जा रहा है। जहां लोग शनिवार को अंतिम दर्शन व श्रद्धांजलि देंगे।
हाल ही में म्यूनिख में आयोजित ISSF विश्व कप से लौटने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी थी। एयरपोर्ट से उन्हें सीधे दिल्ली मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था,उपचार के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर है।
उत्तराखंड की धरती से निकला विश्व विजेता
28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जन्मे जसपाल राणा ने बेहद कम उम्र में निशानेबाजी में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके पिता नारायण सिंह राणा स्वयं शूटिंग से जुड़े रहे और जसपाल के पहले कोच बने। बचपन से ही अनुशासन, एकाग्रता और लक्ष्य के प्रति समर्पण उनकी पहचान बन गए।
18 साल की उम्र में अर्जुन पुरस्कार
जसपाल राणा ने 1994 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। उसी वर्ष मात्र 18 वर्ष की उम्र में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बाद में 1997 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
पदकों का अंबार
जसपाल राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में दर्जनों पदक जीते।
उनके नाम राष्ट्रमंडल खेलों में 15 पदक दर्ज हैं, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2006 एशियाई खेलों में उन्होंने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। एक प्रतियोगिता में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की थी।
खिलाड़ी से महान कोच तक
प्रतिस्पर्धी शूटिंग से आगे बढ़कर जसपाल राणा ने खुद को एक सफल कोच के रूप में स्थापित किया। उन्होंने भारत की नई पीढ़ी के निशानेबाजों को तैयार किया और मानसिक मजबूती को प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना।
उनकी कोचिंग में भारतीय शूटिंग ने नई ऊंचाइयों को छुआ। विशेष रूप से भारतीय स्टार शूटर Manu Bhaker की सफलता में उनका बड़ा योगदान माना जाता है। पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर के ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे जसपाल राणा की मेहनत और मार्गदर्शन को व्यापक रूप से सराहा गया।
द्रोणाचार्य सम्मान
खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने में उनके योगदान के लिए उन्हें 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके कोचिंग करियर की सर्वोच्च उपलब्धियों में से एक था।
उत्तराखंड का गौरव
जसपाल राणा केवल भारत ही नहीं बल्कि उत्तराखंड की भी शान थे। 2025 में उन्हें उत्तराखंड गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने हमेशा पहाड़ के युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अंतिम विदाई
जसपाल राणा का जाना केवल एक खिलाड़ी या कोच का निधन नहीं है, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के एक युग का अंत है। प्रधानमंत्री Narendra Modi सहित देशभर के खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।



